रामगोपाल यादव की हुई सपा में वापसी,कहा नेताजी मेरे खिलाफ नहीं थे

रामगोपाल यादव की हुई सपा में वापसी,कहा नेताजी मेरे खिलाफ नहीं थे

नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी सुप्रीमों मुलायम सिंह यादव ने अपने चचेरे भाई रामगोपाल यादव को फिर से पार्टी में ले लिया है। खबर है कि रामगोपाल यादव पार्टी के महासचिव व राष्ट्रीय प्रवक्ता बने रहेंगे। इतना ही नहीं इसके साथ ही वह राज्यसभा में संसदीय दल के नेता के तौर पर भ्ज्ञी अपनी भूमिका निभाते रहेंगे। गौरतलब हो कि रामगोपाल यादव को करीब एक महिना पहले 6 साल के लिए सपा पार्टी से निकाल दिया गया था। इस तरह छह साल के लिए निकाले गए रामगोपाल यादव की एक महीने के भीतर ही पार्टी में वापसी हो गई है।

मीड़िया खबरों के मुताबिक मुलायम सिंह ने गुरुवार को दिल्ली से अपने दस्तखत से एक आदेश जारी किया है। जिसमें कहा गया कि रामगोपाल का निष्कासन तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाता है। साथ ही यह भी कहा गया है कि प्रोफेसर साहब के नाम से मशहूर रामगोपाल पार्टी के फिर केंद्रीय संसदीय बोर्ड के सदस्य बना दिए गए हैं। रामगोपाल को अनुशासनहीनता व पार्टी विरोधी गतिविधियों के चलते इसी 23 अक्टूबर को पार्टी से छह साल के लिए निकाल दिया गया था। गौरतलब हो कि सपा के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने उन पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनके निष्कासन पत्र पर दस्तखत किए थे। बुधवार को राज्यसभा में रामगोपाल के पार्टी की ओर से बोलने के बाद यह सवाल उठ रहा था कि वह पार्टी के भीतर है या बाहर। जिस पर अब फिर से सपा सुप्रीमों मुलायम यादव ने अब फैसला करके स्थिति साफ कर दी।

वहीं इस पर रामगोपाल यादव ने प्रतिक्रिया में कहा कि नेताजी अपने मन से कभी मेरे खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकते थे। इसी कारण से मेरा निष्कासन रद्द किया गया है। उन्होंने कहा कि में तकनीकी रूप से जरूर निकाला गया था मगर मैं पार्टी से कभी बाहर नहीं गया था। मैं सपा का जन्मजात सदस्य हूं। पार्टी में मेरी वापसी हुई है, यह नेताजी की कृपा है। साथ ही उन्होंने कहा कि नेता जी कभी मेरे खिलाफ नहीं थे। हम नेताजी के निर्देश के हिसाब से ही काम करेंगे। मैंने पहले भी कभी निदेर्शों का उल्लंघन नहीं किया।

यह आरोप लगा था रामगोपाल पर
आपकों बता दे कि सपा प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल ने 23 अक्टूबर को प्रेस कांफ्रेंस करके कहा था कि रामगोपाल ने पिछले कई सालों में सपा के अनुषांगिक संगठनों को काफी कमजोर कर दिया है। रामगोपाल सीबीआई से खुद को, अपने सांसद पुत्र अक्षय व पुत्रवधु को बचाने के लिए सपा के वजूद को साम्प्रदायिक ताकतों के हाथों में गिरवी रखने में लगे हैं। अपने षडयंत्रों को पूरा करने के लिए वह तीन बार भाजपा के बड़े नेताओं से मिल चुके है। इतना ही नहीं इसके अलावा भी रामगोपाल पर भाजपा की शह पर बिहार में सपा के नेतत्व में बने जनता परिवार तथा महागठबंधन को तोड़ने में मुख्य भूमिका निभाने का आरोप भी लगाया था। वहीं रामगोपाल ने इन अपने उपर लगे इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था।

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